Sunday, December 8, 2024

मन मन्दिर में तेरी पूजा

 

मन मन्दिर में तेरी पूजा प्रिय मन ही मन मैं करती हूँ।

इस दिल में है सूरत तेरी मैं मन में दर्शन करती हूँ।

तू साथ रहो या दूर रहो, मन सदा सुखी रहता मेरा

जिस ओर निहारु प्रिय तुमको, उस ओर मैं दर्शन करती हूँ। मन....

सब सुख मेरा तू ले लेना, दुख अपना मुझको दे देना,

तू सुखी रहो तो हे साथी, दुख में सुख अनुभव करती हूँ । मन...

ये भाव सुमन खिलते रहते, पुलकित हृदय के कानन में

इन सुमनों को तेरी मूरत पै रोज चढ़ाया करती हूँ । मन......

 

मन तू जग से नेह लगइहअ

 

नेह लगइहअ (हृइय भाव)

मन तू जग से नेह लगइहअ

अजगर लिपटत रहत मलय से सावधान हो रहिहअ ।

तनिक ना विष व्याप्त चंदन में वेसे ही बन जइहअ ।॥

पाक कीच में कमल खिलेला देख के हे मन बुझिहअ।

फिर भी निर्मल कमल रहेला अपना के समझइहअ ॥

इ दुनिया काजल के घर बा जिनगी ठीक बितइहअ ।

"आशावादी" दाग न लागे हरदम देहु बच इह्अ ।।

 

मन के दर्पण में प्रिये

 

मन के दर्पण में प्रिये तुमको रोज निहारा करता हूँ।

हौले हौले दिल में है प्रिये, रोज सँवारा करता हूँ ।।

चँदा दीखे आकाश में तब कुमुदनी खिल जाती है

आती जब तू याद तो हे प्रिये, दिल को खिलाया करता हूँ । मन

मँडराते भौरे कलियों पर रोज दिवाना बनकर वे

सच्च कहूँ सपने में मैं तुम पर मंडराया करता हूँ। मन

मछली जैसे पानी बिना, है तड़प तड़प कर मरती वह,

तू मानो अथवा मत मानो, तुम बिना मैं तड़पा करता हूँ। मन

ये शलभ दीये से जल जाते, पागल बन रोज दिवाने ये,

हर क्षण हर रोज तुम्हारे लिए, मैं दिल को जलाया करता हूँ। मन

 

भारत मैया ये आँसू बहाए

 

भारत मैया ये आँसू बहाए,

क्या मैं सुनाऊँ, क्या मैं बताऊँ ।

टूट गये इन शहीदों के सपने

किसको बताऊँ, कैसे सुनाऊँ ।

कितनों ने अपने प्राण गँवाये

फांसी के फंदे गले से लगाये,

सोचा, खिलेगा चमन ये हमारा

सूख गया हाय क्या गीत गाऊँ । 

भारत कितनी सीताओं के नयन बरसते,

लाखों ये रावण पग पग पर मिलते,

राम न कोई दीख रहा है,

अस्मत सीताओं की कैसे बचाऊँ । भारत....

झूठ यहाँ पर बिहंस रहा है,

सत्य यहाँ पर सिसक रहा है,

रक्षक ही भक्षक बन जाते

किससे किससे दर्द सुनाऊँ । भारत"..."

शहीदों की पूजा कैसे करूँ मैं

इनकी गाथाएँ कैसे कहूँ मैं,

श्रीनाथ "आशावादी" आँसू बहाये

कैसे शहीदों को फूल चढ़ाऊँ । भारत"

भारत में रहने वाले सब

 

भारत में रहने वाले सब इस मातृभूमि के प्यारे हैं ।

हम कोटि कोटि भारतवासी सबके नयनों के तारे हैं।

गिरिजाघर या मंदिर वाले, सिख बोद्ध हो या मस्जिद वाले,

ये भिन्न वेश भाषा वाले, सब एक देश के प्यारे हैं । भारत'

इसकी धरती कहती हमसे, माता सा प्यार करो मन से,

अर्पित कर दो सब तन मन से, भारत के सभी दुलारे हैं । भारत'

नदियों की धाराएँ सोहें, हिम गिरि चाँदी सा मन मोहे,

बन बाग बगीचा सब सोहें, सब एक एक से न्यारे हैं । भारत"

हम प्रेम में बंध जाएँ, सब प्रगति राह पर चल पाएँ,

आये सब मिलकरके गायें, भारत के सभी हमारे हैं । भारत"

 

भारत माई रोई रोई

 

भारत माई रोई रोई करे आहवान हो ।

जागअ जागअ भाई लोग कर कल्याण हो ।

 

हमनी के जाति-पाटी माटी में मिलवलस,

 गाँवा गाई लोगवा में झगड़ा लगवलम,

अबकी मिटावे के बा जात के निशान हो । भारत माई

 

देशवा में होत बाटे बड़ा अत्याचारवा,

गरीब लो एक होके लीहें अधिकरवा ।

छोटे बड़े सभे लोग होइहें समानहो । भारत माई

 

अंधविश्वास में तू मत विश्वास करअ,

आशावादी,कहे आपन बुद्धिया केआश करअ,

बनी नाहीं तब केहू, केहू के गुलाम हो। भारत माई

भारत माँ के लिए

 

गंगा की भी कसम,

 यमुना की भी कसम, जान देंगे।

भारत माँ के लिए जान देंगे।

झांसी की रानी की शान हममें 

महाराणा का अरमान हममें ।

हम न बरबाद हों,

 हर घर आबाद हो, न झुके गे ।

भारत माँ के लिए न झुके गे। गंगा...

यह तिरंगा है अरमान सबका

 सचमुच अभिमान है इस वतन का।

झंडा कभी न झुके

 शान कभी न मिटे, प्राण देंगे।

भारत मां के लिए प्राण देंगे। गंगा.......

 

भारत माँ की शान हैं

 

छात्र हमारे, सचमुच प्यारे, भारत माँ की शान हैं ।

निदा कभी न करना इनकी, ये सबके अरमान हैं ।।

इनमें वीर जवाहर, गाँधी, कितने खुदीराम हैं,

छिपा हुआ जो गुण इनमें है-नहीं हमें पहचान है,

आयें, भाई, इन्हें बता दें- ये कितने गुणवान हैं । छात्र..."

आजादी का बिगुल बजा तो घर घर मस्ती छाई थी,

सात शहीदों ने अपने सीने पर गोलियाँ खाई थीं,

उन्हीं तरह हम इन्हें बता दें- ये भी वीर महान् हैं । छात्र

जैसा देखेंगे वैसा ही छात्र हमारे सीखेंगे,

सबका हो सुधार, ये भाई, ये ही भाग्य को लिखेगे,

आशावादी" कहते ये तो भारत के भगवान हैं। छात्र"

 

 

 

फूल से दुलहिनियाँ

 

नारी जब सिंगार करे त फूल भी लजा जाला,

नारी जब कठोर बने त पत्थर भी शरमा जाला ।

आशावादी कहे कि नारिये से युद्ध में,

बड़े-बड़ वीरन के पाँव डगमगा जाला ।

 

जिनगी सँवारेला अधिकार लेके रहिहें ।

फूल से दुलहिनियाँ अंगार बनि जईहें ।।

मोम से मुलायम हई, पत्थर से कठोर हो,

केहू खातिर अमृत हुई, केह खातिर जहर हो

बिगड़ल दुनिया ला इ माहूर बनि जइहें । फूल

 

झांसी के रानी के इ जान ताटे दुनिया,

शान तुड़ली दुश्मन के मान ताटे दुनिया

झाँसी,के रानी के अवतार कनि जड़्हें । फूल से

 

जगिहें बहिनिया त बड़ा उपकर होई।

सचसुच घरवा आ देश  कें उद्धार होई

आशावादी के ई रहिया पे चलिहें,

फूल से दुलहिनियाँ अंगार बनि जइहें।

 

पतवार प्रियतम तू बनो

 

मेरी जिन्दगी की नाव का पतवार प्रियतम तू बनो।

इस जिन्दगी की राह का कर्णधार साथी तू बनो।

जब प्रेम की एक बूंद खातिर प्यास से तड़पा करूँ।

मेरे लिए बरसात मुसलाधार साथी तू बनो ।

इस जिन्दगी में कष्ट का पतझड़ हमेशा आ रहा,

तो मन की दुनिया में सरस ऋतुराज हे प्रिय, तू बनो।

मन को व्यथा के ताप से तपता दिवस झुलसा रहा,

मेरे लिए अब चाँदनी की रात साथी तू बनो।

Monday, December 2, 2024

मदिरालय से दूरी कैसी

हे मित्र वर , हे प्रिय वर, 

हे मित्र वर , हे प्रिय वर।  


हे मित्र वर , हे प्रिय वर, 

कैसा ये आलाप प्रियवर। 

मदिरालय से दूरी कैसी,

कैसा नया प्रलाप प्रियवर। 


जो सुख मिल जाता तुमको,

मदिरा और मदिरालय में,

वो पुण्य नहीं मिल सकता है ,

प्रभु नेह , हरि आलय में? 


सुरा पान था तुझको प्रियकर, 

मदिरालय हीं तुझको ज्ञेय। 

प्रभु नाम से तुझे प्राप्त क्या, 

जो तुझको किंचित अज्ञेय। 


एक पैग से मिलता वो , 

जो ना मिलता है ईश्वर में, 

एक पैग से मिलते हैं दस, 

ईश्वर इस तन नश्वर में।


नहीं जरूरत योग ध्यान की,  

परम धाम मिलता झटपट है। 

इंद्र आदि सब मदिरा गामी,  

फिर क्यों मदिरा से खटपट है?


हे मित्र वर , हे प्रिय वर, 

हे मित्र वर , हे प्रिय वर।  


सुन कर ऐसी बात मित्र की, 

दूजे मित्र का डोला दिल। 

बोला आज हीं छोड़ी मदिरा, 

तुझे बताऊँ गले आ मिल। 


मेरे मित्र यूँ भी ना मुझपे, 

ऐसे तू संदेह करो। 

ना तू अष्टवक्र सा ज्ञानी, 

और ना मैं विदेह अहो। 


फिर भी मदिरालय का मैंने, 

स्वईक्षा परित्याग किया। 

ना कोई संताप है मन में, 

ना कोई वैराग्य लिया। 


सब धर्मों में सख्त मना है

मदिरा कर्म दुष्कर्म मना है, 

आज मेरी पर राह यही है, 

आज वक्त की चाह यही है। 


और नहीं पीने का कारण

मदिरा तुझे बताता हूँ,

अभी अभी तो आठ पैग ले,

मदिरालय से आता हूँ।


मदिरा मदिरालय से दुरी, 

एक मात्र दिन की हीं है। 

और नहीं पी सकता मदिरा, 

आज आठ पैग पी ली है। 


हे मित्र वर , हे प्रिय वर, 

हे मित्र वर , हे प्रिय वर।  


अजय अमिताभ सुमन

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