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Sunday, November 9, 2025

खेतवा में रोएली जनानवा


गरीब के कहानी लिखे में आँख से लोर बह जाला,

दूख के जिनगी देख के सांचो नु करेज फट जाला ।

आशावादी कहे भगवान बारे कि नईखन, 

गरीब के देख के इहे प्रश्न बन जाला ।।

 

खेतवा में रोएली जनानवा ए मएनवा, कहाँ गईले ना ।

हमार आँखि के रतनवा कहाँ गईले ना ॥

 

पूछला पर मालूम भईल, घर के गरीब हई,

मरद हरवाह हटे बड़ा बदनसीब हई ।

बारी जनमवले उ तीन गो लईकवा,

तरसेलेसन अन्नअ खातिर उ बालाकावा ॥

बाटे टूटल फूस के मकानवा ए मएनवा, दुख वे में ना

बीते जिनगी दिनवा दुखवे में ना ॥ 

हमार आँखि के रतनवा कहाँ गईले ना ॥

 

घरवा में पड़ल रहे मरद बेरमिया,

दउवा ना उधार करे डाक्टर हरमिया ।

मालिक से कर्जा लेक दवा-दारु कईली,

मरत संवागवा के प्राणवा बचवली।

पथअ खातिर रहे नाहीं अन्नवा ए मएनवा,  ।

बरसे झर-झर नएनवा, सावन अईसन ना ॥ 

हमार आँखि के रतनवा कहाँ गईले ना ॥

 

अनअ बिना घरवा में बनेना भोजनवा,

खाये खातिर बिलखत रलेसन ललनवा ।

ओकनी के आपन कलेजा से सटवली,

सुसुकत लईकवन के रोवत समझवली ।

होत भोरे करब कटनिया ए मएनवा, 

तोह के देहब हम भोजनवा, करेजवा सुनु ना ।। 

हमार आँखि के रतनवा कहाँ गईले ना ॥

 

खईला बिना छतिया में दूधवो ना आवे,

गोदी के बालकवा उ सूखले चबावे ।

फाटि जाइत छतिया त खूनवे पियवतीं,

बिलखत मएनवा के भूखवा मिटइतीं।।

इहे करे धनिया के मनवा ए मएनवा, पूरा होखे ना ।

कभी मनआ के सपनवा, पूरा होखे ना ।। 

हमार आँखि के रतनवा कहाँ गईले ना ॥

 

बगिया में कोईल जब कुहू कुहु करेला,

चिड़ई चुड़ूंगवन के चह-चह होखेला ।

बीस दिन के बालका के गोदिया उठवली,

काटे खातिर गेहुआँ के खेतवा में गईली ।

पेट खातिर सुख बा सपनवा ए मएनवा, देहिआ में ना ।

नईखे एक बूद खूनवा, देहिआ में ना ॥ 

हमार आँखि के रतनवा कहाँ गईले ना ॥

 

बुंदा- बूंदी होखे कभी बहेला पवनवा,

धनिया के दूख देखि रोवे आसमानवा ।

खेतवा के एक ओर लईको सुतवली,

फाटल गमछिया के देह पर ओढ़वली ।

काटे लगली गेहुआँ के थानवा ए मएनवा, कामवे पर ना ।

रहे धनिया के धेयानवा कामवे पर ना ॥ 

हमार आँखि के रतनवा कहाँ गईले ना ॥

 

एहि बीचे जोर से बालकवा चिहुँकलस,

सोचली कि बाबू नींदवे में सपनईलस ।

काटे लगली गेहुँआ त गोदिया उठावे,

गईली लईकवा के दूधवा पियावे ।

करे लगली जोर से रोदनवा ए मएनवा, सियरा लेलस ना ।

हमारे बाबू के परानवा, सियरा लेलस ना। 

हमार आँखि के रतनवा कहाँ गईले ना ॥

 

रोअल सुनि गँउआ के लोग सब जुटल,

श्रीनाथ आशावादी छाती सभे पीटल ।

देणवा में बड़कन लोगवा के राज बा,

मिहनत करे वाला इहाँ मुँहताज वा ।

इहे ह आजाद हिन्दुस्तानवा ए मएनवा, गरीबवन के ना ।

नईले केह भगवानवा गरीबवन के ना । 

हमार आँखि के रतनवा कहाँ गईले ना ॥


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