Showing posts with label मृत होकर मृतशेष रहे. Show all posts
Showing posts with label मृत होकर मृतशेष रहे. Show all posts

Saturday, February 10, 2024

मृत होकर मृतशेष रहे

या मर जाये या मारे चित्त,
में कर के ये दृढ निश्चय,

शत्रु शिविर को जो चलता हो ,
हार फले कि या हो जय।

समरअग्नि अति चंड प्रलय हो,
सर्वनाश हीं रण में तय हो,

तरुण बुढ़ापा ,युवा हीं वय हो ,
फिर भी मन से रहे अभय जो।

ऐसे युद्धक अरिसिंधु में , 
मिटकर भी सविशेष रहे।

जग में उनके अवशेष रहे ,
शूर मृत होकर मृतशेष रहे।

अजय अमिताभ सुमन 

My Blog List

Followers

Total Pageviews