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Thursday, July 17, 2025

एक द्रष्टा

 अनगिनत पृथ्वियां

इसके भीतर

अनगिनत कहानियां
इसके भीतर

प्रेम की
वार की

अनगिनत राज्य
अनगिनत राजे
इसके भीतर

अनगिनत दृश्य
आते जाते
दुहराते
अनगिनत समय से

और
सबमे संलिप्त
और सबसे निर्लिप्त

आकाश की भांति
होता है योगी
एकदम अछूता

एक द्रष्टा

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