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Wednesday, November 6, 2024

जरा बना दे इनके मन की अबकी तो सरकार

पत्थर धर सर पर चलते हैं मजदूरों के घर मिलते हैं,
टोपी कुर्ता कभी जनेऊ कंधे पर धारण करते हैं।
कंघा पगड़ी जाने क्या क्या सब तो है तैयार,
दीन दयालु दीन बंधु हे विनती बारंबार,
जरा बना दे इनके मन की अबकी तो सरकार।

अल्लाह नाम भज लेते भाई राम नाम जप लेते भाई,
मंदिर मस्जिद स्वाद लगी अब गुरुद्वारे चख लेते भाई।
जीसस का भी भोग लगा जाते साई दरबार,
दीन दयालु दीन बंधु हे विनती बारंबार,
जरा बना दे इनके मन की अबकी तो सरकार।

नैन मटक्का पे भी यूँ ना छेड़ो तीर कमान,
चूक वुक तो होती रहती भारत देश महान ,
गले पड़े तो शोर शराबा क्योंकर इतनी बार?
दीन दयालु दीन बंधु हे विनती बारंबार,
जरा बना दे इनके मन की अबकी तो सरकार।

माना उनके कहने का कुछ ऐसा है अन्दाज,
हँसी कभी आ जाती हमको और कभी तो लाज।
भूल चुक है माना पर माफी दे दो इस बार।
दीन दयालु दीन बंधु हे विनती बारंबार,
जरा बना दे इनके मन की अबकी तो सरकार।

प्रजातंत्र में तो होते रहते है एक बवाल,
चमचों में रहतें है जाने कैसे देश का हाल।
सीख जाएंगे देश चलाना आये जो इस बार।
दीन दयालु दीन बंधु हे विनती बारंबार,
जरा बना दे इनके मन की अबकी तो सरकार।

फ़टी जेब ले चलते जग में छाले पड़ जाते हैं पग में,
मर्सिडीज पे उड़ने वाले क्या क्या कष्ट सहे हैं जग में।
जोगी बन दर घूम रहे हैं मेरे राज कुमार,
दीन दयालु दीन बंधु हे विनती बारंबार,
जरा बना दे इनके मन की अबकी तो सरकार।

मेहनत में कोई कमी नही पर एक बात का रोना,
किस्मत की हीं खोट नोट का ना डिपोजल होना।
तिसपे भारी लगती लगती ई.वी.एम.की मार,
दीन दयालु दीन बंधु हे विनती बारंबार,
जरा बना दे इनके मन की अबकी तो सरकार।

जिसे देश चलाना एक दिन ढूंढे अपना फ्यूचर,
जन्म पत्री तो ठीक ठाक कहते हैं ये कंप्यूटर।
राहु केतु जो आन पड़े हैं कर दो बेड़ा पार।
दीन दयालु दीन बंधु हे विनती बारंबार,
जरा बना दे इनके मन की अबकी तो सरकार।

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