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Thursday, July 17, 2025

क्या है तुममें?

बर्फ की ऊँची चोटियों पर घात लगाए दुश्मन से भिड़ने को तैयार युद्ध में जाता हुआ एक भारतीय सैनिक, रात्रि में अपनी नव विवाहिता पत्नी को, जो कि गाँव में उसका इंतजार कर रही होती है, पत्र लिखते हुए उससे साहस की माँग करता है। वो लिखता कि जैसे वो अपने देश को प्रेम करता है ठीक वैसे हीं वो उससे भी करता है। अगर वो युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो जाए तो रोना मत। जिस साहस से वो युद्ध को जा रहा है, उसी साहस से, उसकी अनुपस्थिती में क्या वो जीवन युद्ध को लड़ पायेगी? भले हीं वो उससे बात नहीं कर पायेगी, देख नहीं पायेगी पर  जब भी बंद आँखों को टटोलेगी, हृदय को स्पर्श करता हुआ मिल जाऊँगा। 

मौन होकर प्राण-तरुवर को झुका ले  ठान मन में ,
धूल बन आँगन सजाना, ऐसा साहस क्या है तुममें?

जब हमारे बीच प्रेमाभिव्यक्ति बन कर बह चला हो,
नील अम्बर सा उभर कर, वेग था जो थम चला हो।
श्वेत आँचल  दे  सको  तुम  देह  को अं तिम  विदाई ,
मौत तक भी  साथ देने का वादा भी  क्या है तुममें?
मौन होकर प्राण-तरुवर को झुका ले  ठान मन में ,
धूल बन आँगन सजाना, ऐसा साहस क्या है तुममें?

मूर्खता बन कर न रोओ, अश्रु केवल भार होंगे,
मृत चक्षु में प्रज्ञा ना ढूँढ़ो, ना कोई संसार होंगे ।
गोद में धर शीश रोना, कुछ न कहना, देख लेना,
हँसते हँसते पीर सहने का भी साहस क्या है तुममें?
मौन होकर प्राण-तरुवर को झुका ले  ठान मन में ,
धूल बन आँगन सजाना, ऐसा साहस क्या है तुममें?

गीत मेरे गा सको तो, स्वर में रच लो मौन मेरा,
चित्र मेरे हाथ रख कर हीं समझ तू कौन मेरा।  
हाँ आवाजे मेरी फिर भी कान तक जाती  रहेंगी,
कान बंद कर नाम मेरा सुन हीं लेना क्या है तुममें?
मौन होकर प्राण-तरुवर को झुका ले  ठान मन में ,
धूल बन आँगन सजाना, ऐसा साहस क्या है तुममें?

मैं नहीं गर इस जहाँ में मुझको पर महसूस करना,
गर रुको तुम जग समर में बन के गुलफानूस रहना।   
पढ़ लेना इन शब्दों को तुम मैं रचा हूँ मैं बसा हूँ , 
तुझको तो मैं छू हीं लूँगा वो समझ बाकी क्या तुममें?
मौन होकर प्राण-तरुवर को झुका ले  ठान मन में ,
धूल बन आँगन सजाना, ऐसा साहस क्या है तुममें?

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