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Friday, January 2, 2026

प्रतिक्रिया

रेस्तरां में हल्की पीली रोशनी फैली हुई थी। धीमा संगीत बज रहा था और चम्मच-काँटों की आवाज़ों के बीच बातचीत का एक शोर था। उसी माहौल में एक युवक ने हिम्मत जुटाई। उसने सामने वाली मेज़ पर अकेली बैठी एक लड़की की ओर देखा, मुस्कराया और शालीनता से पूछा—

“क्या मैं आपके साथ बैठ सकता हूँ?”

अचानक लड़की की आवाज़ पूरे रेस्तरां में गूँज उठी।
“क्या?? क्या तुम मेरे साथ एक रात बिताना चाहोगे?? क्या तुम पागल हो?!”

एक पल के लिए जैसे समय थम गया। आसपास बैठे लोग खाना छोड़कर उनकी ओर देखने लगे। कुछ की भौंहें चढ़ गईं, कुछ के चेहरे पर हैरानी थी, और कुछ में नैतिक गुस्सा। युवक का चेहरा लाल पड़ गया। उसे समझ ही नहीं आया कि उसने ऐसा क्या कह दिया। बिना कुछ बोले, सिर झुकाए वह उठ खड़ा हुआ और शर्मिंदगी के साथ दूसरी खाली मेज़ पर जाकर बैठ गया।

कुछ मिनट बीते। माहौल फिर सामान्य होने लगा। तभी लड़की उठी, अपना बैग संभाला और हँसते हुए उस युवक के पास आई। अब युवक ने चैन की साँस ली। वह पास आकर  बोली,“मैं मनोविज्ञान का छात्रा हूँ। दरअसल, मैं आपका  व्यवहार देख रही थी। यह जानना चाहती थी कि अचानक सार्वजनिक अपमान पर इंसान कैसे प्रतिक्रिया करता है।उस लड़की ने हल्की मुस्कान के साथ युवक को देखा। 

युवक ने जानबूझकर अपनी आवाज़ ऊँची कर दी और बोला—“क्या?? सिर्फ एक रात के लिए 3,000 डॉलर?! यह तो हद से ज़्यादा है!!”

अब की बार पूरा रेस्तरां चौंक गया। सभी की निगाहें  लड़की पर टिक गईं। कुछ के चेहरे पर अविश्वास था, कुछ में घृणा, और कुछ में फुसफुसाहटें शुरू हो गईं। वही लड़की, जो कुछ देर पहले नैतिकता की ऊँची आवाज़ थी, अब सबकी नज़रों में कटघरे में खड़ी थी।

युवक खामोशी से उठा, उसके पास गया और धीरे से उसके कान में फुसफुसाया—“मैं भी एक वकील हूँ… और मुझे अच्छे से पता है कि हालात को अपने पक्ष में कैसे मोड़ा जाता है।”

यह कहकर वह मुस्कराया और बाहर निकल गया, पीछे छोड़ गया एक सवाल—शब्द ज़्यादा ताक़तवर होते हैं या संदर्भ?

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