Sunday, November 8, 2026

हंसने पर हो जाते वारदात आदमी के

आसां नहीं समझना हर बात आदमी के,
कि हंसने पर हो जाते वारदात आदमी के।

दुनिया बदल रही है, सदियाँ बदल गईं पर,
रुकते नहीं कभी ये, कदमात आदमी के।

आसां नहीं समझना हर बात आदमी के,

कि हंसने पर हो जाते वारदात आदमी के।

बुझते नहीं कफन से,अरमां दफ़न दफ़न से,
जलते हैं तन बदन से, आलात आदमी के।

आसां नहीं समझना हर बात आदमी के,
कि हंसने पर हो जाते वारदात आदमी के।

कि दिन में है बेचैनी और रातों को उलझन,
संभले नहीं संभलते हालात आदमी के।

आसां नहीं समझना हर बात आदमी के,
कि हंसने पर हो जाते वारदात आदमी के।

चेहरे पर कितने चेहरे , भीतर हजार चाहें ,
शिनाख्त हुई मुश्किल ,जज़्बात आदमी के।

आसां नहीं समझना हर बात आदमी के,

कि हंसने पर हो जाते वारदात आदमी के।

मिट्टी से बन के निकला, मिट्टी में मिल गया वो,
फिर भी कहाँ मिटे हैं, ख़्वाहिशात आदमी के।

आसां नहीं समझना हर बात आदमी के,
कि हंसने पर हो जाते वारदात आदमी के।

खुदा भी इससे हारा, इसे चाहिए जग सारा,
जग बदले पर बदले ना , जात आदमी के।

आसां नहीं समझना हर बात आदमी के,

कि हंसने पर हो जाते वारदात आदमी के।


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