Monday, June 22, 2026

हास्य


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20   .विनम्र 

शिष्य : मैं बहुत विनम्र हूँ।

गुरु  :नहीं , तुम्हे विनम्र होने का घमंड है .

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19   .मुक्ति 

शिष्य : मुक्ति क्या है?

गुरु  : जब पड़ोसी की कार देखकर आसानी से नींद आ जाये .

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18  .कठिन 

शिष्य : जीवन इतना कठिन क्यों है?"

गुरु  :इसे आसन बनाने का प्रयास छोड़ दो .

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17   .व्यस्त 

शिष्य : मैं सत्य का खोजी हूँ।

गुरु  :बस बिजली बिल आते हीं छुप जाते हो .

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15  .भटकन 

शिष्य :मेरा मन बहुत भटकता है। क्या करूँ ?

गुरु  :अपने घर का रास्ता हमेशा याद रखना .

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14  .डिस्काउंट 

शिष्य : मुझे मोक्ष चाहिए .

गुरु  : पहले दान दो , स्वर्ग में डिस्काउंट नहीं मिलता .

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13  .जीत 

शिष्य :मैं हार गया।

गुरु  :तुम्हारा अहंकार हारा है , तुम तो जीत गए .

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12  .बदलाव 

शिष्य :मैं दुनिया बदलना चाहता हूँ .

गुरु  :पहले इस सोच को बदलो .

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11 .कौन 

शिष्य :मैं कौन हूँ?

गुरु  :पहले ये जान लो तुम क्या नहीं हो .

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10 .भविष्य 

शिष्य : मैं भविष्य जानना चाहता हूँ .

गुरु  :पहले वर्तमान में रहना तो जान लो .

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9.माया 

शिष्य : माया क्या है?

गुरु  :सेल में गैर-ज़रूरी चीज़ खरीद लेना।

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8.सत्यान्वेषण 

शिष्य : मैं सत्य की रह पर निकलना चाहता हूँ .

गुरु  : अच्छा है . पहले मोबाइल साइलेंट मोड पर कर लो .

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7. उलझन 

शिष्य :मेरा मन उलझन में हैं .

गुरु  :बधाई हो , तुम सोचने लगे . 

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6.बेरोजगार 

शिष्य : मेरी बेरोजगारी मुझे चिंतित करती है .

गुरु  : स्वयं को पूर्ण समझो और कल की चिंता स्वयं बेरोजगार हो जाएगी .

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5.शार्ट कट 

शिष्य : ज्ञान प्राप्त करने का सबसे छोटा मार्ग क्या है .

गुरु  :इस छोटे मार्ग को त्यागना .

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4.शांति 

शिष्य :आज के ज़माने में कैसे शांत रह सकते हैं ?

गुरु  :वाई फाई से लड़ना बंद कर दो .

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3.महानता  

शिष्य :मुर्खता क्या है ?

गुरु  :कोई अपनी महानता सिद्ध करने के लिए पहाड़ पर चढ़ जाता है और पहाड़ को इसका पता भी नहीं चलता .

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2.खोज 

शिष्य : कोई स्वयं को जान क्यों नहीं पाता ?

गुरु  :क्योंकि स्वयं को जानने को खोज आईने से नहीं होती.

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2.सत्य 

शिष्य:"गुरुदेव, आपने महल छोड़कर कठोर तपस्या की। आखिर आपको क्या मिला?"

बुद्ध : "मुझे उस सत्य का बोध हुआ, जो हर जीव और हर स्थान में सदैव विद्यमान है।"

शिष्य: "यदि वही सत्य महल में भी था, तो उसे पाने के लिए आपने महल छोड़ा क्यों , क्या ये आवश्यक था?"

बुद्ध:सत्य को पाने के लिए महल छोड़ना आवश्यक नहीं था, आवश्यक था मेरे मन के भीतर बैठे हुए महल को छोड़ना।  जिसने मन का महल छोड़ दिया, उसके लिए महल भी तपोवन है; और जिसने मन का महल नहीं छोड़ा, उसके लिए तपोवन भी एक महल हीं है।" मेरे द्वारा महल का त्याग स्थान का त्याग  नहीं बल्कि मन का था जो कि सत्य की प्राप्ति हेतु आवश्यक था।

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 1. समाधि 

शिष्य  : समाधि कब घटित होती है ?

गुरु  :जब तुम चश्मा पहनकर चश्मा ढूँढना बंद कर देते हो तब .

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