Monday, July 20, 2026

प्रश्नोत्तर

====
प्रश्नकर्ता: हे श्रीकृष्ण! एक बात मेरी समझ में नहीं आती। भीम और जरासंध का युद्ध अठारह दिनों तक चला। आपको तो पहले दिन से ही ज्ञात था कि जरासंध का वध कैसे होगा, फिर आपने भीम को वह उपाय पहले ही क्यों नहीं बताया?

श्रीकृष्ण: हे प्रिय! यदि मेरा उद्देश्य केवल जरासंध का वध कराना होता, तो वह प्रथम दिन ही हो जाता। परंतु मेरा उद्देश्य केवल एक व्यक्ति का अंत करना नहीं था, बल्कि संसार के सामने दो महायोद्धाओं का वास्तविक सामर्थ्य प्रकट करना भी था।

प्रश्नकर्ता: लेकिन प्रभु, यदि परिणाम पहले से निश्चित था, तो अठारह दिन तक युद्ध कराने की आवश्यकता ही क्या थी?

श्रीकृष्ण: क्योंकि जरासंध कोई साधारण राजा नहीं था। वह अपने समय का महान पराक्रमी, अद्वितीय गदायुद्ध का महारथी और असाधारण बल का स्वामी था। अनेक राजाओं को उसने अपने पराक्रम से पराजित किया था। यदि मैं पहले ही दिन उसका रहस्य बता देता, तो लोग कहते—"जरासंध अपनी शक्ति से नहीं हारा, वह तो केवल उसके जन्म के रहस्य के कारण मारा गया।" इससे उसके पराक्रम का सम्मान नहीं होता।

प्रश्नकर्ता: तो क्या उन अठारह दिनों का युद्ध जरासंध के सम्मान के लिए भी था?

श्रीकृष्ण: केवल उसके सम्मान के लिए ही नहीं, भीम के यश के लिए भी। संसार को यह देखना आवश्यक था कि भीम और जरासंध बल, साहस और धैर्य में एक-दूसरे के समकक्ष हैं। जब अठारह दिनों तक कोई किसी को परास्त न कर सका, तब यह सिद्ध हो गया कि सामान्य युद्ध से निर्णय संभव नहीं था।

प्रश्नकर्ता: तब आपने संकेत क्यों दिया?

श्रीकृष्ण: क्योंकि तब समय आ चुका था। जब पुरुषार्थ अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया और यह स्पष्ट हो गया कि बल से नहीं, केवल उसके जन्म के रहस्य को समझकर ही युद्ध समाप्त हो सकता है, तभी मैंने संकेत दिया। तब विजय केवल मेरी युक्ति की नहीं, भीम के अद्वितीय पराक्रम, धैर्य और अठारह दिनों के पुरुषार्थ की भी थी।

प्रश्नकर्ता: प्रभु, क्या यही शिक्षा हमारे जीवन पर भी लागू होती है?

श्रीकृष्ण: निश्चय ही। मैं जीवन में भी तुम्हें समाधान तुरंत नहीं देता। पहले तुम्हें अपनी पूरी शक्ति, धैर्य और पुरुषार्थ का प्रयोग करने देता हूँ। जब तुम्हारा प्रयास पूर्ण हो जाता है, तब मैं वह संकेत देता हूँ जो तुम्हें विजय तक पहुँचा देता है। स्मरण रखो—बिना पुरुषार्थ के मिला उपाय केवल सुविधा देता है, पर पुरुषार्थ के बाद मिला उपाय स्थायी विजय और यश देता है।
====

No comments:

Post a Comment

My Blog List

Followers

Total Pageviews