मेरी छत चमक चमक के कह रही है आ भी जा,
रे मुझको गंजा ना बना, तुझे कसम है मेरी आ।
जो तू नहीं तो कंघी-कंघा सब बेकार है,
छत पर ठंडी लगती है, मुझको बुखार है।
रे मुझको बुखार है, गई सब बहार है,
मेरी छत चमक चमक के कह रही है आ भी जा,
रे मुझको गंजा ना बना, तुझे कसम है मेरी आ।
तेल शीशी रोती मालिश को तरस रही,
कंघी मेरे हाथ में सवाल कर रही।
बोली तेरे सिर पे अब तो मेरा क्या काम है,
चार बालों की हिफाज़त सुबह-शाम है।
सुबहो शाम है कि ये जीवन बेज़ार है।
मेरी छत चमक चमक के कह रही है आ भी जा,
रे मुझको गंजा ना बना, तुझे कसम है मेरी आ।
नाई की दुकान पर मैं जब भी जाता हूँ,
बाल कटाने से पहले ही घबराता हूँ।
नाई बोले, बैठ जा, आज नया स्टाइल दूँ,
जो बचे हैं चार बाल, उनको भी विदा कर दूँ!
रे नाई बड़ा चालाक है, हाथों में उस्तरा पाक है,
उस्तरा पाक है कि ये ये छत लाचार है।
मेरी छत चमक चमक के कह रही है आ भी जा,
रे मुझको गंजा ना बना, तुझे कसम है मेरी आ।
बीवी मेरी देखकर मुझको मुस्कुराने लगी,
मेरे चमकते माथे पर चाँद बनाने लगी।
बोली, रात में बिजली का बिल बच जाएगा,
तेरे सिर का रिफ्लेक्शन घर चमकाएगा!
घर चमकाएगा कि ना कोई श्रृंगार है
मेरी छत चमक चमक के कह रही है आ भी जा,
रे मुझको गंजा ना बना, तुझे कसम है मेरी आ।
मेरी छत चमक चमक के कह रही है आ भी जा,
रे मुझको गंजा ना बना, तुझे कसम है मेरी आ।
जो तू नहीं तो कंघी-कंघा सब बेकार है,
छत पर ठंडी लगती है, मुझको बुखार है।
रे मुझको बुखार है, गई सब बहार है,
बालों से खाली सही, दिल में प्यार अपार है!
मेरी छत चमक चमक के कह रही है आ भी जा,
रे मुझको गंजा ना बना, तुझे कसम है मेरी आ।
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