Friday, November 8, 2024

प्रिय की नजर में प्रिये महान होती है

 

प्रिय की नजर में प्रिये महान होती है,

सब लोगों से बढ़कर वह गुणवान होती है,

"आशावादी" का कथन सत्य है साथी,

चाँद से भी सुन्दर इंसान होती है।

हे प्रियदशिनी, तुम्हीं बताओ कैसे गीत सुनाऊँ मैं ।

नहीं लेखनी की क्षमता है तुमपर काव्य बनाऊँ मैं ।।

स्वर्ण लेखनी हो, अमृत की स्याही यदि मेरे पास में,

लिख पाता कविता तुमपर यदि काव्य शक्ति हो पास में,

सच्च कहूँ मुझे शब्द न मिलते, प्रिये तेरा गुण गाऊँ मैं । हे

तेरे मुख मंडल की तुलना चाँद से कैसे कर सकता,

दाग है उसमें इसीलिए तो उपमा नहीं मैं दे सकता,

तू तो स्वच्छ दर्पण जैसी हो, उपमा कहीं न पाऊँ मैं । हे"

हे गुलाब में सरस मधुरता फिर भी कांटे होते हैं,

चुभ जाते छुने वाले को, दुखदायी तब होते हैं,

तू तो हमेशा सुखदायी हो, तुम सा फूल न पाऊँ मैं। हे .

 

तिलक दान दहेज सबके हरान करत ता

 

शेर- नाच-बाजा फैशन वाली शादी बरबाद करे ।

लड़का लड़की दुनू के घरवो के नाश करे

"आशावादी" कहे एलान रउआ सुन लीं,

समाजोद्धार संघ ए कुपरथा के विनाश करे ।।

 

गीत- समाजोद्धार संघ सगरो एलान करअ ता ।

 

तिलक दान दहेज सबके हरान करत ता ।।

कइसन सुन्दर चीज ह शादी  तिलक कर देता बरबादी।

जबड़न दान दहेज वसुलाला है पइ सा पानी में बह जाला ।

लईकी वाला के तिलक अ परेशान करअ ता । तिलक दान .....

 

आदमी कतनो होखे खोटा शादी रुपये से तय होता ।

तिलक बन गइल बा शान है जाता लड़की सन के जान।

नाच बाजा वाली शदिया नुकसान करअ ता । तिलक दान'

 

शदिया के अवसर आवे लईकी बाला रोवे गावे ।

बाकिर सब कुछ उ भूल जाला लइका वाला जब हो जाला ।

उहे लईका के शादी में गूमान करअ ता । तिलक दान

 

आशावादी कहे गाईं तनी सोचअ बहिन, भाई ।

घर-घर करअ तू परच र तिलक रही ना आधार ।

तिलक बनके शैतान परेशान करअ ता । तिलक दान

जिधर देखता हूँ तू ही दिखाई पड़ती है

 

शेर-जिधर देखता हूँ तू ही दिखाई पड़ती है,

हर आवाज में तेरी बात सुनाई पड़ती है।

सच्च मानो, हे प्रिये, दूर होने से क्या,

हर मुस्कान में तेरी मुस्कान दिखाई पड़ती है।

गीत- पता नहीं क्यों याद तुम्हारी, मेरे दिल को सता रही है।

सच्च कहूँ ऐ मृदुभाषिणी, रसमय वाणी लुभा रही है ।

कितनी ही अबलाओं को इस धरती पर मैं देख रहा हूँ,

तनिक नहीं वे मन को भातीं, मन ही मन मैं सोच रहा हूँ,

पर छवि तेरी चाँद सी हे प्रिये,मन चकोर से लुभा रही है। पता .

सहनशीलता की देवी तू, रूप-गुण का भांडार हो तू,

सरस मधुरता सद्गुण का मैं सत्य कहूँ अवतार हो तू ,

चाँदनी सी मुस्कान तुम्हारी मन प्रसून को खिला रही है । पता "

खुश रहना हर क्षण हे सुन्दरी, यही भाव मन में मेरा,

तेरे सुख में ही बसता है जीवन का सब सुख मेरा,

प्रम के सपने में तेरी श्रद्धा की डोरी झुला रही है । पता

जय हे भारत भुमि महान

 

जय हे भारत भुमि महान् ।

मुकुट बना हिमगिरि मस्तक का करता तेरा त्राण ।

गंगा, यमुना सरिताए सब गातीं गौरव गान ।।

शस्य श्यामला धरती पहने हरा रंग परिधान ।

सागर धोता चरण तुम्हारा विध्य बना सम्मान ॥

मंदिर मस्जिद, गिरिजाघर, गुरुद्वारे एक समान ।

कोटि कोटि भारतवासी के ये दिल के अरमान ।।

नत मस्तक तेरे चरणों पर हम तेरी संतान ।

तम मन अपित करते हम सब बढ़ तुम्हारी शान ।।

देशवा के होई उद्धार हो

 

देशवा के होई उद्धार हो, जब बहिनियाँ ई पढिहें।

घरे घरे आई बहार हो, जब बहिनियाँ इ जगिहें ।

 

घर के बनईहैं, वहरवो सजइहें ,

बिगड़ल दुनिया के रहिया बतइहें ।

हो जाई देशवा के सिंगार हो, जब बहिनियाँ इ बुझिहें । 

 

घरे घरे" घरवा में ज्ञानअ के दीया जलइहें,

 बाहर में दुनिया के दुखवा मिटइहें ।

मिट जाई सगरो अन्हार हो, जब बहिनियाँ इ चहिहें । 

 

घरे घरे कोमल कलाई खाली पेन्ही ना कंगनवा,

 देशवा के भाग लिखी हाथ के कलमवा।

"आशावादी, के वा इहे पूकार हो, इ बहिनियाँ ना डरिहें । घरे घरे"


धीरे धीरे साँझ देवी आवस त

 

धीरे धीरे साँझ देवी आवस त ,देखि देखि चाँद मुस्काले हे ।

चमके चाँदनिया के चुनरी त ,देखि देखि चाँद अगड़ाले हे ।

धरती सहेलिया से गले गले मिलली ,गले गले मिलली हो 

गले गले मिलली।

सोना अइसन छिड़के किरिणिया,आ मने मने चाँद हरषाले हे । 

धीरे धीरे कुमूदनी सखिया के दिलवा फुलाइल 

दिलवा फुलाइल हो दिलवा

झींगुर के झलके पैजनिया कि सुनि सुनि चंदा जुड़ाले हे । धीरे धीरे

कहीं क हीं छिपी छिपी झाँके भगजोनिया हो झाँके भगजोनिया हो 

"आशावादी" देखि अगड़ाले कि चाँद कइसे अंखिया निहारे हे। धीरे

 

चले साजन के साथ दुलह्विनिया रे

 

चले साजन के साथ दुलह्विनिया रे

चले साजन के साथे दुलहिनिया रे ।

जइसे चंदा के संगे चंदनिया रे ॥

 

सुन्दर चेहरा इ कमल के बा फूलवा बनल,

आँख दीखे जइसे फूलबा पर भौरा बइ ठल ।

चमके चाँद अइसन सोना के नथुनिया रे। चले'

 

दुनू सेव अइसन दौखेला लाल गालवा,

नाक सुगवा इ देखि के लुभाय जाला।

काला केश ज इसे काली नगीनिया रे । चले'

 

गरदन हवे कपोत कंठ कोईलिया,

दाँत चमक ता जइसे ह बिजुरिया ।

"आशावादी" ताके जईसे हरिणिया रे । चले'

 

घू'घट बीचे जरेली

 

घू'घट बीचे जरेली. बहिनियाँ हमार हो ।

कहिया ले सहबू अहिन अइसन अत्याचार हो ।।

 

टी० वी० मोटर साईकिल खातिर लोग सब मारेला,

ई फूल लेखाँ देहिया के तेल से जरावेला । 

सारा सुख छीनेला दहेज के बाजार हो । घू घट

 

बेटिये के उजड़ला घरबा दुआरवा,

दुलहन पर टूटेला विपत्ति के पहाड़वा।।

गरभे में वेटिये के मारे संसार हो । घूँ'घट

 

सोच अ बहिन, सोच अ फुआ सोच अ बुढ़ी माई ,

तहरे से भागी इं दहेज वा कसाई। 

झांसी के अब रानी बनके ले ल अवतार हो । घू' धट'

 

श्री नाथ "आशावादी" दरद सुनावेले ,

गॅउबा नगरिया में सब के बतावेले ।

ज गिहें बहिनियाँ त होइहें उद्धार हो । घूँधट

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