इम्तिहान
खुदा ये तू भी तेरा जहान क्या है?
सफर ये कैसा तेरा इम्तिहान क्या हैं?
कि दुनिया भी है तेरी और बंदे भी तेरे,
और पूछते तुझीसे पहचान क्या है?
अजय अमिताभ सुमन
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इम्तिहान
खुदा ये तू भी तेरा जहान क्या है?
सफर ये कैसा तेरा इम्तिहान क्या हैं?
कि दुनिया भी है तेरी और बंदे भी तेरे,
और पूछते तुझीसे पहचान क्या है?
अजय अमिताभ सुमन
दुनिया ये तेरी मेरी ,फरक फकत के यूं है,
ना आरजू हुनुज है , ना कोई जुस्तजू हैI
दियार-ए-खंजर माफिक, है मंजर कायनात के,
ताऊन से भी उसरत, तबियत हालात केI
धुएं का असर है कि , लहर इक सड़ा हुआ,
जहर में बसर है ये , खाक में पड़ा हुआ।
बह रही ना हर सहर ,मसर्रत बहार की,
शामें है शाम-ए-हिज्र ,रातें शब-ए-फ़िराक़ कीI
सजदे तो मैं भी रखता ,रहगुजर में माबूद,
फकत तल्खी-ए-जिस्त से ,रूह तन्हा रंज-ए-वजूद।
चलो चलें पूरा करने ,अपने आपने शौक,
तू पैदा कर नस्ल-ए-आदम, मैं मुकर्रर अपनी मौतI
अजय अमिताभ सुमन
हवाओं पर कोई कहानी लिखूं,
अपनी मैं क्यों जिंदगानी लिखूं?
लहरें क्या सागर में बनना बिछड़ना है ,
मिट्टी का जीवन मिट्टी में बिखरना है,
हंसना कभी रोना निखरना बिफरना,
है जन्मों की आदत पुरानी लिखूं?
हवाओं पर कोई कहानी लिखूं,
अपनी मैं क्यों जिंदगानी लिखूं?
अजय अमिताभ सुमन
तू भी क्या चीज है कि
नाम का गिला नहीं,
शोहरत की दौड़ में थे
सब तू हिला नहीं।
नफासत के पीछे
कुछ विरासत के पीछे ,
कुछ रोजी और रोटी
सियासत के पीछे।
एक तू है कि नाम ना
काम की फिकर है,
बदनाम भी है पूरा
फिर भी बेफिकर है?
रियासत की दौड़ में थे
सब तू मिला नहीं,
माजरा ये क्या है
बाजार में हिला नहीं?
अजय अमिताभ सुमन
सर्वाधिकार सुरक्षित
ईश्वर की शक्ति असीम और अपरम्पार है। सूरज की रोशनी आखिर धरती पर कैसे पहुंचती है। धरती अनेक मौसम आते हैं। परंतु उनको बारी बारी से एक क्रम में कौन लाता है? धरती को और सौर मंडल के अनेक तारों और ग्रहों को कौन थामे रहता है? आखिर कौन है वो शक्ति?ईश्वर की असीम शक्ति को रेखांकित करती हुई कविता।
दिनकर की दीप्ति को आखिर,
अवनि पर पहुंचाता कौन?
शीत ग्रीष्म वृष्टि को क्रम से,
एक एक कर लाता कौन?
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एक अहन को तृण हस्त में,
रख पाना ना आसां है,
किंतु उसकी पाणि में शशि ,
मुष्टि में कहकशाँ है?
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दिनकर को रचता अंतर में,
तारों को धरता अंदर में,
ग्रह को रखता जो अभ्यंतर,
परम तत्व वो शक्ति कौन?
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दिनकर की दीप्ति को आखिर,
अवनि पर पहुंचाता कौन?
शीत ग्रीष्म वृष्टि को क्रम से,
एक एक कर लाता कौन?
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अजय अमिताभ सुमन
सर्वाधिकार सुरक्षित
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चीन का सर्वप्रथम जिक्र महाभारत के आदि पर्व में आता है । आदि पर्व के चैत्र रथ पर्व में इस बात का जिक्र आता है कि अर्जुन से चैत्र रथ नामक गन्धर्व का युद्ध होता है। जब गन्धर्व ही अर्जुन से हार हो जाती है तब वो अर्जुन से मित्रता करके अनेक कहानियां बताता है । इसी घटना क्रम में अर्जुन को ताप्ती नंदन कहकर संबोधित करता है , तो इसी दौरान विश्वामित्र और वशिष्ठ के बीच लड़ाई का भी जिक्र करता है । जब गन्धर्व विश्वामित्र और वशिष्ठ के बीच की लड़ाई का वर्णन करता है तब बताता है कि कैसे नंदिनी गाय ने क्रुद्ध होकर अनेक देशों को जन्म दिया और उनमें से एक चीन भी था । इस घटनाक्रम को विस्तारपूर्वक देखते हैं।
चीन का वर्णन महाभारत में दूसरी बार सभा पर्व के दिग्विजय पर्व में आता जब अर्जुन भारतवर्ष के उत्तर भाग स्थित प्रदेशों का दौरा करते हैं और इन प्रदेशों को जीतते चले जाते हैं। इसी क्रम में अर्जुन का प्रागज्योतिनरेश राजा भागदत्त के साथ युद्ध का वर्णन है। जब राजा भागदत के प्रदेश का वर्णन किया किया है वहीं पर इसके सीमावर्ती प्रदेशों में एक चीन का भी वर्णन किया गया है।
चीन का तीसरी बार जिक्र स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के मुख से किया है जो कि वन पर्व के इंद्र लोक गमन पर्व में उद्धृत है। कौरवों द्वारा जुए में हार जाने के बाद जब पांडव वन में जाने को बाध्य हो जाते हैं तब भगवान श्रीकृष्ण उनसे मिलने आते हैं। यहां पर श्रीकृष्ण बताते है कि कैसे राजसूय यज्ञ में चीन का राजा भी युद्धिष्ठिर के रसोइ में आया था। छल द्वारा धर्मराज का राज्य छीन लिया गया था इसी कारण श्रीकृष्ण आगे प्रतिज्ञा भी करते हैं कि वो पांडवों को उनका छीना हुआ राज्य वापस दिला देंगे।
चीन का चौथी बार जिक्र उद्योग पर्व के भगवदयान पर्व में आता है। जब श्रीकृष्ण संधि का प्रस्ताव लेकर जाने वाले होते हैं तब भीम उन्हें आगाह करते हैं। दुर्योधन की क्रोधपूर्ण वृत्ति से आगाह करते हुए श्रीकृष्ण से कटु बातें नहीं करने की सलाह भी देते हैं। अपनी बात को देखने के लिए भीम श्रीकृष्ण को 16 राजवंशों का नाम भी बताते हैं और ये भी चेताते हैं कि कैसे उन वंशों के राजाओं द्वारा पूरे वंश का सर्वनाश किया गया। इसी प्रक्रम में भीम द्वारा चीन के एक राजवंश का वर्णन किया गया है।
चीन का पांचवी बार जिक्र भीष्म पर्व के भूमि पर्व में आता है जब धृतराष्ट्र के पूछने पर संजय दुर्योधन द्वारा अधीन पूरे भारतवर्ष का वर्णन करते है। यहीं पर पर संजय पुरे भारत वर्ष का वर्णन करते हैं और चीन को दुर्योधन द्वारा शासित प्रदेशों में से एक प्रदेश बताते हैं।
चीन का छठी बार जिक्र महाभारत के शांति पर्व के राजधार्मनुशासन पर्व में आता है। युद्ध खत्म होने के बाद जब भीष्म पितामह अपने शरीर का त्याग नहीं करते हैं और सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार करते हैं तब युद्धिष्ठिर उनसे जाकर जीवन की शिक्षा लेते हैं । इसी प्रक्रम में जब युद्धिष्ठिर भीष्म पितामह से राजधर्म के बारे में पूछते हैं , तब भीष्म उन्हें राजा मान्धाता और इंद्र के बीच हुए संवाद का वर्णन करते हैं। इसी संवाद में राजा मांधाता द्वारा चीन को अपने द्वारा शासित प्रदेशों में से एक बताया गया है।
यद्यपि महाभारत के वनपर्व के अजगर पर्व की एक और घटना है जहां पर राजा सुबाहु के हिम प्रदेश का वर्णन आता है, फिर भी चीन शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। पांडवों के गंद मादन , बदरिकाश्रम , सुबहुनगर में प्रवेश का वर्णन किया है । बाद की घटनाओं में भीम के पूर्वज राजा नाहुष द्वारा, जो कि एक अजगर बन गए थे, भीम को जकड़ने तथा युधिष्ठिर द्वारा उस अजगर बने नाहुष के प्रश्नों का उत्तर देने के बाद भीम के बंधन मुक्त होने का वर्णन किया गया है। इसी क्रम में सुबाहु के हिम प्रदेश का वर्णन है जिसे कुछ अन्य किताबों में चीन के नाम से संबोधित किया गया है।
इस प्रकार हम देखते हैं कि चीन का वर्णन महाभारत में लगभग 7 स्थानों पर वर्णन आता है। इन उल्लेखों से एक बात तो साफ जाहिर हो जाता है कि न केवल भगवान श्रीकृष्ण, भीम , अर्जुन, चित्र रथ नामक गंधर्व, संजय, भीष्म पितामह, युधिष्ठिर बल्कि राजा मांधाता और इंद्र इन सबको चीन के बारे में जानकारी थी। इन उल्लेखों से ये भी साबित होता है कि चीन कभी ना कभी वृहद भारत का हिस्सा रहा था और इसकी सीमा केवल चीन ही नहीं, अपितु आज के पाकिस्तान, अफगानिस्तान, यवन ,ईरान , उज़्बेकिस्तान आदि स्थानों तक फैला हुआ था।
अजय अमिताभ सुमन