अनगिनत पृथ्वियां
इसके भीतर
अनगिनत कहानियां
इसके भीतर
प्रेम की
वार की
अनगिनत राज्य
अनगिनत राजे
इसके भीतर
अनगिनत दृश्य
आते जाते
दुहराते
अनगिनत समय से
और
सबमे संलिप्त
और सबसे निर्लिप्त
आकाश की भांति
होता है योगी
एकदम अछूता
एक द्रष्टा
इस ब्लॉग पे प्रस्तुत सारी रचनाओं (लेख/हास्य व्ययंग/ कहानी/कविता) का लेखक मैं हूँ तथा ये मेरे द्वारा लिखी गयी है। मेरी ये रचना मूल है । मेरे बिना लिखित स्वीकीर्ति के कोई भी इस रचना का, या इसके किसी भी हिस्से का इस्तेमाल किसी भी तरीके से नही कर सकता। यदि कोई इस तरह का काम मेरे बिना लिखित स्वीकीर्ति के करता है तो ये मेरे अधिकारों का उल्लंघन माना जायेगा जो की मुझे कानूनन प्राप्त है। (अजय अमिताभ सुमन: सर्वाधिकार सुरक्षित :Ajay Amitabh Suman:All Rights Reserved)
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