Thursday, December 7, 2017

अपनी नयनों के पट खोल


     अपनी नयनों के पट खोल
     झब्बर बकरा बोले बोल
     खुल गयी डेमोक्रेसी की पोल
     की धूर्त नेता जनता बकलोल

     डेमोक्रसी की यही पहचान
     जाने जनता यही है ज्ञान
     कि कहीं थूक सकती है वो
     कि कहीं मूत सकती है वो
     जनता की परिभाषा गोल
     अपनी नयनों के पट खोल
     झब्बर बकरा बोले बोल
     खुल गयी डेमोक्रेसी की पोल
     की धूर्त नेता जनता बकलोल

     सर नापे सर मापे नेता
     जनता के सर जापे नेता
     ज्ञानी मानी व नत्थू खेरा
     सबको एक ही माने नेता
     नम्बर का हीं यहाँ है मोल
     अपनी नयनों के पट खोल
     झब्बर बकरा बोले बोल
     खुल गयी डेमोक्रेसी की पोल
     की धूर्त नेता जनता बकलोल


     जो बच्चे पढ़ते बनते नौकर
     गुंडे राज करते सर चढ़ कर
     राजा चौपट , नगरी अंधेर
     न्याय की बात तो है गुड़ गोबर
     सारा सिस्टम है ढकलोल
     अपनी नयनों के पट खोल
     झब्बर बकरा बोले बोल
     खुल गयी डेमोक्रेसी की पोल
     की धूर्त नेता जनता बकलोल


     ज्ञान का नहीं है कोई मान
     ताकत का है बस सम्मान
     जनता लुटे , नेता चुसे
     बची नहीं है इनकी जान
     कोई तो इनका भांडा फोड़  
     अपनी नयनों के पट खोल
     झब्बर बकरा बोले बोल
     खुल गयी डेमोक्रेसी की पोल
     की धूर्त नेता जनता बकलोल


      

     अजय अमिताभ सुमन

No comments:

Post a Comment

My Blog List

Followers

Total Pageviews