एक दिन कोर्ट की सीढ़ियों पर दो वकील टकरा गए। पहले वकील ने मुस्कराते हुए कहा—“नमस्कार मिस्टर बॉडी बिल्डर! आजकल बड़े फिट दिख रहे हैं।”
दूसरे वकील तुरंत समझ गए कि मामला व्यंग्य का है। उन्होंने नटाई ठीक की और बोले—“धन्यवाद, मिस्टर केस बिल्डर! आप भी कुछ ज़्यादा ही मजबूत केस लेकर घूम रहे हैं।”
पहला वकील हँस पड़ा—“अरे भाई, शरीर की मांसपेशियाँ तो जिम में बनती हैं, पर केस की मांसपेशियाँ… वो तो तारीखों, दलीलों और स्टे ऑर्डर से बनती हैं।”
दूसरा वकील ठहाका मारकर बोला—“बिलकुल! इंसान की बॉडी छह महीने में ढीली पड़ जाती है,पर केस? केस तो दस साल बाद भी ‘इन प्राइम कंडीशन’ में रहता है।”
पहला बोला—“जिम छोड़ दो तो बॉडी टूट जाती है, पर केस छोड़ दो… तो भी चलता रहता है!”
दूसरा बोला—“और देखो कमाल, बॉडी बिल्डर प्रोटीन पीता है,
हम केस बिल्डर— कॉफी, चाय और जज साहब की एक ‘अंतरिम टिप्पणी’ से ही ताकत पा लेते हैं।”
दोनों हँसते हुए बोले—“इसलिए भाई, दुनिया में सबसे ताकतवर चीज़ कोई बॉडी नहीं…सबसे ज़्यादा मसल वाला होता है— एक अच्छा बना हुआ केस!”
और फिर दोनों अपनी-अपनी फाइलें उठाकर बोले—
“चलो, आज फिर कोर्ट में मसल्स दिखाने हैं!”
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