एक बार की बात है, एक छोटे से शहर में एक प्यारा सा लड़का रहता था, जिसका नाम था चिंटू। चिंटू बहुत जिज्ञासु था – मतलब हर चीज के पीछे पड़ जाता था, जैसे कोई रिपोर्टर।
एक दिन सुबह-सुबह चिंटू बिस्तर से उठा और देखा कि स्कूल जाने का टाइम हो गया, लेकिन मम्मी-पापा चाय पी रहे हैं, कोई जल्दी नहीं। चिंटू दौड़ता हुआ पापा के पास गया और बोला,
“पापा! आज स्कूल में छुट्टी क्यों है? मैं तो सोचा था मैडम जी आज फिर मेरी कॉपी फाड़कर मुझे स्टैंड ऑन द बेंच करवाएंगी!”
पापा ने चाय का घूंट लिया और मुस्कुराते हुए बोले, “बेटा, आज 14 नवंबर है।”
चिंटू ने आंखें गोल कीं, “तो? क्या आज कोई नया प्लैनेट डिस्कवर हुआ है?”
“नहीं रे चिंटू, आज चिल्ड्रन्स डे है!”
“वाह! चिल्ड्रन्स डे!” चिंटू खुशी से उछल पड़ा। “फिर तो टीचर्स क्यों इतना मुस्कुरा रही थीं कल? जैसे लॉटरी लग गई हो!”
पापा हंस पड़े, “क्योंकि आज बच्चे खुश रहते हैं, और बच्चे खुश तो टीचर्स खुश। घर में भी यही फॉर्मूला है – तुम खुश तो मम्मी खुश, मम्मी खुश तो पापा खुश।”
“और बच्चे खुश क्यों होते हैं?” चिंटू ने तुरंत अगला सवाल दागा।
“अरे बाबू, क्योंकि स्कूल बंद है! कोई होमवर्क नहीं, कोई पीरियड नहीं, कोई ‘स्टैंड अप ऑन द बेंच’ नहीं। बस फुल मस्ती!”
चिंटू सोच में पड़ गया। “ये चिल्ड्रन्स डे आखिर होता क्या है?”
पापा गंभीर होकर बोले, “बेटा, आज चाचा नेहरू का बर्थडे है।”
“चाचा नेहरू?” चिंटू हैरान। “मेरे तो सिर्फ सोनू चाचा हैं, जो आते ही मेरे गाल खींचते हैं। ये चाचा नेहरू कौन हैं? आपने कभी मिलवाया ही नहीं! फोटो भी नहीं दिखाई!”
पापा ने बताया, “वो इंडिया के पहले प्राइम मिनिस्टर थे। बहुत बड़े लीडर। बच्चों से बहुत प्यार करते थे। इसलिए उनका बर्थडे चिल्ड्रन्स डे के रूप में मनाते हैं।”
“प्राइम मिनिस्टर क्या होता है?” चिंटू की जिज्ञासा बढ़ती जा रही थी।
“वो जो पूरे देश को चलाता है। रोड बनवाता है, ट्रेन चलवाता है, सबको ऑर्डर देता है।”
चिंटू ने पापा को ऊपर से नीचे तक देखा और बोला, “तो फिर आप देश क्यों नहीं चलाते पापा? आप तो सिर्फ ऑफिस जाते हो और शाम को थके-हारे आते हो!”
पापा खांसते हुए बोले, “बेटा, प्राइम मिनिस्टर बनने के लिए बहुत ताकत चाहिए। बहुत बड़ी ताकत!”
“कितनी बड़ी? हल्क से भी ज्यादा? थॉर वाली?”
“नहीं बेटा… स्पाइडरमैन से थोड़ी कम, आयरन मैन से थोड़ी ज्यादा, और हल्क से बहुत कम।”
“तो आपके पास ताकत नहीं है?” चिंटू ने मासूमियत से पूछा।
“है रे चिंटू! मेरे पास भी ताकत है। मैं घर चलाता हूँ। बिजली का बिल भरता हूँ, राशन लाता हूँ, तेरी फीस भरता हूँ। ये भी कोई कम ताकत है भाई?”
“लेकिन प्राइम मिनिस्टर वाली ताकत क्यों नहीं?”
पापा ने गहरी सांस ली, “बेटा, तुम बड़े होकर समझ जाओगे। अभी तुम्हारी उम्र नासमझी की है।”
“पर मैं अभी क्यों नहीं समझ सकता?”
“क्योंकि अभी तुम्हारी उम्र समझने की नहीं, समोसे और आइसक्रीम खाने की है!”
“नहीं पापा, मुझे अभी समझना है!”
पापा ने चाबी निकाली और लहराते हुए बोले, “ठीक है, पहले ये कार चलाकर दिखाओ!”
चिंटू पीछे हट गया, “अरे नहीं! मैं तो अभी छोटा हूँ। पैर भी ब्रेक तक नहीं पहुँचते!”
पापा मुस्कुराए, “बस यही बात है! छोटे हो इसलिए कार नहीं चला सकते। इसी तरह छोटे हो इसलिए देश चलाने की बात भी अभी नहीं समझ सकते। जब बड़े हो जाओगे, कार चला लोगे, वोट डालोगे, तब समझ जाओगे।”
चिंटू थोड़ा शांत हुआ, फिर अचानक बोला, “अच्छा… तो चाचा नेहरू कहाँ हैं अभी?”
“क्यों? क्या प्लान है?”
“अरे पापा, शाम हो गई ना! बर्थडे सेलिब्रेट करना है। केक काटना है, गिफ्ट देना है। मैं अपना पुराना रिमोट वाला हेलिकॉप्टर दे दूँगा उन्हें!”
पापा का चेहरा गंभीर हो गया। “बेटा… चाचा नेहरू तो अब इस दुनिया में नहीं हैं। मतलब… स्वर्ग में पार्टी कर रहे होंगे।”
चिंटू की आंखें बड़ी हो गईं, “तो फिर उनका बर्थडे क्यों मना रहे हैं? स्वर्ग में केक पहुँचेगा कैसे? ड्रोन से?”
पापा हंस पड़े, “अरे ये सवाल तुम पूछ रहे हो या मैं? अच्छा, इंटेलिजेंट कौन है – तुम या पापा?”
चिंटू सर खुजाने लगा, “पापा… मैं तो…”
“चलो, अब तुम ही बताओ – मरने के बाद भी बर्थडे क्यों मनाते हैं?”
चिंटू ने सोचा-सोचा और फिर चहक उठा, “पापा, शायद… शायद इसलिए कि स्कूल बंद रहे!”
पापा जोर से हंसे, “हा हा हा! बिलकुल सही जवाब! मुझे भी ठीक-ठीक नहीं पता, लेकिन स्कूल बंद रहता है ना, बस यही काफी है!”
फिर पापा ने चिंटू को गले लगाया और बोले, “चलो अब छुट्टी का फायदा उठाओ – चिप्स खाओ, कार्टून देखो, गेम खेलो। देश की चिंता कल से शुरू करना। आज तो बस चाचा नेहरू को दूर से हैप्पी बर्थडे बोल दो!”
चिंटू ने छत की तरफ देखकर जोर से चिल्लाया, “हैप्पी बर्थडे चाचा नेहरू! थैंक यू स्कूल बंद करने के लिए!”
और इस तरह चिंटू का चिल्ड्रन्स डे बड़े मजे से बीता। आखिर बच्चों का दिन था ना – सवाल पूछने का, मस्ती करने का, और सबसे जरूरी… स्कूल न जाने का!
No comments:
Post a Comment