पटना के सबसे चकाचक न्यूज़ चैनल “गरम बहस लाइव” पर आज स्टूडियो में कुर्सियों से ज्यादा माइक्रोफोन लगे थे। होस्ट अपनी मशहूर गरजती आवाज़ में चीखता हुआ बोला —
“आज का ज्वलंत सवाल! क्या बिहार में पलायन समस्या है या वरदान? पैनल से मिलिए!”
पहली स्क्रीन पर दुबई से जुड़ते हैं रंजीत कुमार, जो पिछले पाँच सालों से कॉल सेंटर में काम करता है, लेकिन अपने इंस्टाग्राम बायो में proudly लिखता है — Global Corporate Executive (Night Shift).
दूसरी स्क्रीन पर मेलबर्न से गुड्डू पासवान जुड़े हैं, जिनकी नौकरी पूछो तो जवाब मिलता — “By profession Plumber, by attitude Australian.”
तीसरी स्क्रीन पर पंजाब से मनोज सिंह, जो खुद कहते हैं —“मैं परदेश गया नहीं, पंजाब ही बिहार के पास आ गया था।”
और स्टूडियो में आमने-सामने बैठाए गए मेहमान —
कर्नाटक से रवि
गुजरात से प्रवीण
महाराष्ट्र से भावना
और UP से पंडित जी (जो हर राज्य विषय में अपनी राय रखने का constitutional अधिकार रखते हैं।)
बहस शुरू होते ही रवि बोले —“बिहार में लोग बाहर क्यों भाग जाते हैं? क्या वहां रह नहीं सकते?”
गुड्डू ने मेलबर्न से चश्मा सीधा किया —“रह सकते थे भाई, पर फिर मेलबर्न में भोजपुरी वाला ठाठ कौन लाता? हम नहीं आते तो ऑस्ट्रेलिया को IPL, भांगड़ा और बॉलीवुड का अंतर कैसे समझ आता?”
प्रवीण ने हल्का सा तंज कसा —“हम गुजरात में बिजनेस फैलाते हैं, तुम लोग बस पलायन फैलाते हो।”
तभी मनोज ने मेज पर हल्की चोट मारी —“प्रवीण भाई, वही पलायन किए बिहारी लोग हैं जो आपकी कंपनियाँ चला रहे हैं। हम नहीं जाएँगे तो गुजरात में इंजीनियर ढूँढने की टेंडर निकालनी पड़ेगी।”
पूरे स्टूडियो में हँसी दब गई, मगर बहस गरम होती गई।
भवना बोली —“लेकिन फैमिली से दूर रहना इमोशनली मुश्किल नहीं होता?”
रंजीत ने दुबई से जवाब दिया —“पहले हम पापा की बात घर में नहीं सुनते थे, आज रोज वीडियो कॉल पर पूछते हैं —‘पापा, दाल चावल खाया कि नहीं? ठंडा पानी मत पीजिएगा।’इमोशनल कनेक्शन और कहाँ मिलता है? पलायन न होता तो ये प्यार कभी activate नहीं होता।”
यही समय था जब UP वाले पंडित जी कूद पड़े —“लेकिन पलायन से बिहार का विकास रुक जाता है!”
गुड्डू ने तुरंत काउंटर फेंका —“अगर हम सब बिहार में ही रुक जाएँ तो —दिल्ली के पीजी में रहेगा कौन?गुड़गाँव में 3 बजे रात को ‘भैया U टर्न मारीए’ कौन बोलेगा?IAS टॉपरों की लिस्ट में नाम कौन भरेगा?और विदेशी को क्रिएटिव इंग्लिश एक्सेंट में ‘हे ब्रदर नो टेंशन’ सिखाएगा कौन?”
स्टूडियो तालियों और हँसी से गूँज गया।
होस्ट गला फाड़ते हुए बोला —“मतलब आप पलायन को वरदान मानते हैं?”
मनोज मुस्कुराए —“देखिए, बिहार में ना पलायन है, ना migration है… यह National Human Resource Distribution Policy है। हम लोग देश और दुनिया में भेजे गए skilled ambassadors हैं। दूसरों के बच्चे GPS पर जगह ढूँढते हैं, बिहारी बच्चे GPS को जगह सिखा देते हैं — ‘देख ले, घर पटना से दाहिने मुड़के ही शुरू होता है।’”
रंजीत दुबई वाली स्क्रीन से जोड़ा —“और जब हम वापस घर आते हैं ना — तो गाँव में एंट्री ही बॉलीवुड हीरो वाली होती है। माँ घोषणा करती है — बेटा दुबई वाला आ गया!छोटे बच्चों को प्रेरणा मिलती है, बुजुर्गों को उम्मीद मिलती है, और दुकानदारों को उधारी मिलती है।”
होस्ट ने अंतिम सवाल दागा —“तो आपका अंतिम बयान?”
गुड्डू ने मॉर्निंग सनग्लासेस पहनते हुए कहा —“आप बोलिए पलायन समस्या है… हम कहेंगे वरदान है। क्योंकि दुनिया में जहाँ जहाँ बिहारी पहुँचा — वहाँ वहाँ बिहार भी पहुँच गया।”
मनोज ने जोड़ दिया —“पलायन ने बिहार को ग्लोबल बनाया है, परिवार को इमोशनल बनाया है और इंडिया को वर्किंग बनाया है। हम जहाँ भी जाते हैं — ट्रैवल बैग भले बदल जाता है, दिल हमेशा गाँव वाला रहता है।”
और तभी अचानक भारत-ऑस्ट्रेलिया वीडियो कॉल पर गुड्डू की माँ आ गई —“बाबू, खाना खा लेना। और ठंडा पानी मत पीना।”
पूरी बहस खड़ी हँसी में बदल गई।
कैमरामैन ने होस्ट से धीमे में बोला —“सर, आज के TRP सेट है — दर्शक हँसते भी हैं और सीखते भी।”
स्क्रीन पर हेडलाइन चमकी —“बिहार में पलायन — संकट नहीं, सुपरपावर!”
और कहानी यहीं खत्म होती है…क्योंकि बहस ख़त्म होने के बाद NRI पैनल के सारे बिहारी —
व्हाट्सऐप फैमिली ग्रुप में फोटो भेजने चले गए:“स्टूडियो में थे… माँ टीवी पे देखना!”
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