जीवन क्या है मानस पट पे घुमड़ घुमड़ के आते बादल
कभी खुशी के ये उजले बादलकभी गम के ये काले बादल।
कभी भावों से होकर बोझिल आँखों से बरसते बादल।
प्रभु ने सुंदर आकाश दिया मानस पट पे प्रकाश किया।
अहम् स्याही से मानुस ने बंजारों का विकास किया।
ये बंजारे कभी प्रीत सिखाते अपरिचित को मीत बनाते।
कभी मीत बन जाता दुश्मन कभी दुश्मन को प्रीत सिखाते।
जीवन के इस रंगमंच पर, हर बादल का एक भाव है,
कुछ बन अमृत उर भाते हैं, तो कुछ उर पर विष घाव है ।
तूने रचा यह खेल निराला, तू ही है इसका संचालक,
द्वेष अग्नि भी तू हीं देता, दया प्रेम भी तू उद्धारक।
प्रभु भावों के रूप अनगिनत भावों के अनगिनत बादल।
इन भावों के पार प्रभु तू बाधा तेरे ही निर्मित बादल।
मानस पट पर मेरी अपनी, छवि बसा दे जो निर्मल हो,
प्रभु तेरा आशीष रहे कि, तेरे प्रेम से ना वंचित हो।
मेरे उर को देना हीं तुझको, बादल ऐसे देना मुझको।
SC-Midas Hygiene Industries P. Ltd. and Anr. Vs Sudhir Bhatia
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Introduction
The Supreme Court’s decision in Midas Hygiene Industries Pvt. Ltd. v.
Sudhir Bhatia & Ors. is a significant ruling in trademark and copyright
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3 weeks ago
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