Thursday, July 17, 2025

रहमत

 लोगों की नासमझी का उठाने भी दो फायदा,

 “बेनाम” शराफत जताने की भी हद है .

वो नाराज हैं कि आसमाँ से तोड़ा नहीं चाँद को,
समझा दे कोई आशिकी निभाने की भी हद है ,

तेरे कहने से पी तो लूँ, पर बहकने की हद तक ,
बता दे कोई दोस्ती बनाने की भी हद है .

कहने से डरता हूँ मैं , चुप रहकर मरता हूँ मैं 
मोहब्बत में इस कदर , फसाने की भी हद है .

ये आपका ही प्यार है कि जिन्दा मैं अबतलक 
अब मर के यूं ईश्क को बताने की भी हद है

छत की जद्दोह्द में , कब्र तो नसीब की 
खुदा तेरा यूं रहमत बरसाने की भी हद है 

No comments:

Post a Comment

My Blog List

Followers

Total Pageviews